he saw – Hindi Translation – Keybot Dictionary

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10 And straightway coming up out of the water, he saw the heavens opened, and the Spirit like a dove descending upon him:
10 और जब वह पानी से निकलकर ऊपर आया, तो तुरन्त उस ने आकाश को खुलते और आत्मा को कबूतर की नाई अपने ऊपर उतरते देखा।
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A villager went to Shri Nanak Dev ji for the first time. He saw that the saint was sitting in a pensive mood in solitude (he was remembering naam/mantra). That man said – ‘Satnaam-Waheguru’. Shri Nanak ji also replied.
एक गाँव का व्यक्ति पहली बार श्री नानक देव जी के पास गया। उसने देखा कि संत जी मायूस अवस्था में एकांत में बैठे थे।(स्मरण कर रहे थे) उस आदमी ने सतनाम-वाहेगुरू बोला। श्री नानक जी ने भी उत्तर दिया। भोजन करवाया। ज्ञान विचार सुनाए। वह व्यक्ति चला गया। एक दिन फिर वही व्यक्ति आया और बोला महाराज जी! आप कभी खुश दिखाई नहीं देते। क्या कारण है? संत नानक जी ने कहा कि:-
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How GuruMaharaj Came across this piece of land is an interesting fact - while travelling from Faridabad to Delhi, GuruMaharaj Ji's vehicle had a breakdown. When GuruMaharaj got down from his car, he saw an illusionary shining source of water.
अरावली पर्वत के उपत्यका पर फरीदाबाद मण्डलान्तर्गत तव्यास पहाड़ी के भूखण्ड पर सिद्धदाता आश्रम के निर्माण के लिए 1989 में कार्य प्रारंम्भ हुआ। इस भूखण्ड ग्रहण के विषय में एक रोचक किन्तु भावपूर्ण किंवदन्ती जुड़ी हुई है। फरीदाबाद से दिल्ली की ओर जाते समय अचानक गाड़ी रूकने के कारण जून के प्रचण्ड आतप मध्य दिन में महाराज जी को जल का चमकाता हुआ स्रोत दिखाई दिया। वाहन रोक कर निरीक्षण बुद्धि से देखने पर कुछ भी दिखाई नही दिया। परन्तु कुछ अव्यक्त वाणी सुनाई दी, जिसे प्रमाण मानकर उसी स्थान पर आश्रम बनाने की प्रेरणा ग्रहण कर उसे क्रियान्वित करने के लिए प्रारंभिक गतिरोध के बाद इस महान कार्य में सफल हुए और आश्रम निर्माण का कार्य सम्पन्न हुआ।
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After we completed she asked for the JSFA who was the main stumbling block, to come and join the meeting. The moment he saw us his hackles were raised. On being asked by Ms. Grewal as to what were the problems in giving us the grant he started off with a long list of financial mismanagement by AlIMS in which our Centres had no role to play.
1966 में एक दिन मेरे ऑफिस में डॉ. ब्रहम प्रकाश आए जिन्‍होंने सेना में शार्ट सर्विस कमीशन से त्‍यागपत्र दे दिया था और हाल ही में उनकी शादी हुई थी। उन्‍हें कुछ समझ नहीं आ रहा था और उन्‍होंने मुझे सलाह मंत्री कि उन्‍हें क्‍या करना चाहिए। वे मेडिकल कॉलेज, लखनऊ में जनरल सर्जरी में मेरे जूनियर रेजीडेंट के रूप में काम कर चुके थे और यह संबंध लगभग 10 वर्ष पुराना था। मैंने उनसे न्‍यूरोसर्जरी में आने के लिए कहा। हम बेहद उत्‍साह लेकिन न्‍यूनतम सुविधाओं के साथ एमसीएच पाठ्यक्रम शुरू करने हेतु अपेक्षिक औपचारिकताएं पूरी करने में सफल रहे। वह पहले प्रशिक्षु थे और बाद में हमारी फैकल्‍टी में शामिल हुए तथा उसके बाद जी. बी. पंत अस्‍पताल में डायरेक्‍टर प्रोफेसर बने और उन्‍होंने स्‍वयं का एमसीएच प्रोग्राम शुरू किया। एम्‍स को एमसीएच पाठ्यक्रम और बेहतरीन बनता चला गया और हमारे पास 5 वर्ष और 3 वर्ष दोनों की शाखाएं थी। 1965 में न्‍यूरोलॉजी डी. एम. शुरू हो चुका था। अब एम्‍स के प्रशिक्षु भारत भर में फैले हैं। कई विभागों के प्रमुख भी हैं जैसे डॉ. गौरी देवी निम्‍हैन्‍स की डायरेक्‍टर, वाइस चांसलर बनी, डॉ. बी. प्रकाश जी. बी. पंत अस्‍पताल, दिल्‍ली में, डॉ. बी. एस. दास, निम्‍हैन्‍स में डॉ. एस मोहंती, आईएमएस, बीएचयू वाराणसी में डॉ. ए. के. रेड्डी, एनआईएमएस, हैदराबाद में और डॉ. एम. ए. वानी एस के आई एम एस, श्रीनगर में हैं। कई शिक्षण तथा निजी क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण पदों पर हैं। हमें अर्थात् पीएनटी और मुझे हमसे प्रशिक्षण लेने वालों पर अत्‍यंत गर्व है और हम उन्‍हें उनके भावी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं देते हैं। हमारी इच्‍छा है कि उनकी उपलब्धियां हमसे भी अधिक हों। क्लिनिकल सर्विसेज में एक बड़ा मोड़ 1976 में प्रो. एच. डब्‍ल्‍यू पिया के आने से आया जिन्‍होंने लैबोरेटरी माइक्रोसर्जरी का कोर्स किया था। हमने अगले कुछ वर्षों में माइक्रोसर्जरी लैबोरेटरी की शुरूआत की और ऑपरेटिव माइक्रोसर्जरी की पहल की गई। भारतीय परिदृश्‍य में हम सबसे अग्रणी स्‍थान पर आ गए। 60 के अंतिम दशक में ईएनटी सर्जन डॉ. एस. के. कक्‍कर के सहयोग से हमने ट्रांसस्‍फीनायडल पिट्यूटरी सर्जरी शुरू की जिसे 70 के दशक में समेकित किया गया और यह एक नियमित प्रक्रिया बन गई।