millet – Hindi Translation – Keybot Dictionary

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Shri Harlal Jaat used to transport goods of businessmen from one market to the other on a bullock-cart on hire, just as currently goods are transported on hired trucks or canters etc from one market to the other. It was around year 1750 when unrefined sugar, refined sugar, rice, wheat, millet, jaggery, barley, beans etc were transported through bullock-carts on hire.
श्री हरलाल जाट जी बैलगाड़ी के द्वारा व्यापारियों का सामान एक मण्डी से दूसरी मण्डी में किराए पर लाता-ले जाता था। जैसे वर्तमान में ट्रक या कैंटर आदि से भाड़े पर माल एक मण्डी से दूसरी मण्डी में लाते-ले जाते हैं। सन् 1750 के आसपास का समय था। जब बैलगाड़ियों द्वारा शक्कर, बूरा, चावल, गेहूँ, ज्वार, गुड़-बाजरा, गवार आदि-आदि को भाड़े पर ढ़ोते थे। बेरी से नजफगढ़ की मण्डी का रास्ता गाँव छुड़ानी से होकर जाता था। श्री हरलाल जी का एक बैल गोरे रंग का था जो कामचोर था। गाड़ी में चलते-चलते कुछ देर बाद बैठ जाता। उसको डण्डों से मारपीट करके उठाया जाता। कुछ दूरी पर फिर बैठ जाता। यह सिलसिला चलता रहा। एक दिन गर्मियों के मौसम में सुबह के लगभग 4 बजे श्री हरलाल जी नजफगढ़ की मण्डी से गाड़ी भरकर लौट रहा था। गाँव छुड़ानी के पास एक कूंए से कुछ दूरी पर वह बैल बैठ गया। हरलाल जी उसको डण्डा मारने लगा। उस कूंए पर गाँव छुड़ानी के संत गरीबदास जी स्नान कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हे हरलाल! मत मार, गऊ का जाया है। संत गरीबदास जी जाट किसान थे। साधारण वेशभूषा जो हरियाणा की थी, धोती-कुर्ता पहनते थे। हरलाल जी बोले, भाई! इसनै मेरा खून पी राख्या है। आधा मील चलता है, बैठ जाता है। संत गरीबदास जी उस बैल के पास गए और उसके कान में कुछ बोला। उसी समय वह गोरा बैल तुरंत खड़ा हो गया। संत गरीबदास जी बोले, अब यह बैल ठीक चलेगा। श्री हरलाल जी को विश्वास नहीं हुआ। गाड़ी लेकर चल पड़ा। वह गोरा बैल दूसरे बैल से भी तेज गति से चलने लगा। छुड़ानी गाँव से बेरी तक बैठा भी नहीं तो श्री हरलाल जी के आश्चर्य तथा खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने घर पर अपने परिवार वालों से बताया तो उनको भी यकीन नहीं हो रहा था। उसके पश्चात् हरलाल जाट गाँव छुड़ानी में गया। उससे गलती यह लगी थी कि उसने उस स्नान करने वाले का नाम नहीं पूछा था। उल्टे पाँव गाँव छुड़ानी को चल पड़ा। विचार किया था कि शायद प्रतिदिन उसी समय स्नान करने आता होगा। इसलिए सुबह 4 बजे उसी कूंए पर पहुँचा तो संत गरीबदास जी ने पूछा कि हे हरलाल भाई! उस बैल के बारे में जानने आए हो क्या? हरलाल जी ने कहा कि आपसे कुछ नहीं छुपा है। मैं आपसे यही जानने आया हूँ कि आपने क्या जादू कर दिया? वह बैल तो दूसरे से भी तेज चलता है। संत गरीबदास जी ने पूछा कि यह बता, आपके चैबारे में एक साधु रहता था, उसका क्या हाल है? मैं एक दिन उससे मिलकर आया था। उस दिन आप गाड़ी लेकर कहीं गए हुए थे। हरलाल जी ने बताया कि वह तो चार वर्ष पहले चोला त्याग गया। उसकी यादगार (मैण्डी) भी बना रखी है। संत गरीबदास जी ने कहा कि यह गोरा बैल वही पाखण्डी बाबा है। मैंने उससे ज्ञान चर्चा की थी। उसको समझाया था कि आपकी भक्ति गलत है। आप भक्ति भी नहीं करते हो, खाते हो और सो जाते हो। परमात्मा के दरबार में जब लेखा होगा, तब आपको पता चलेगा। जो खा रहे हो, यह देना पड़ेगा।