rocks – Hindi Translation – Keybot Dictionary
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6 Who can stand before his indignation? and who can abide in the fierceness of his anger? his fury is poured out like fire, and the
rocks
are thrown down by him.
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6 उसके क्रोध का साम्हना कौन कर सकता है? और जब उसका क्रोध भड़कता है, तब कौन ठहर सकता है? उसकी जलजलाहट आग की नाईं भड़क जाती है, और चट्टानें उसकी शक्ति से फट फटकर गिरती हैं।
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sothebysrealty.fi
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The Paleolithic cave art: Primitive paintings on the walls in the caves or on the shadow of
rocks
drawn by primitive men of the latter half of the Paleolithic Age. Many paintings depict animals. The most famous sites are Lascone in France and Altamira in Spain.
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takenouchi-documents.com
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Paleolithic गुफा कला: गुफाओं में दीवारों पर या आदिम चित्रों Paleolithic आयु के उत्तरार्द्ध के आदिम लोगों द्वारा तैयार की चट्टानों की छाया पर. कई चित्रों जानवरों को दर्शाती है. फ्रांस और स्पेन में Altamira में सबसे प्रसिद्ध साइटों Lascone हैं.
museum.gov.tm
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Most elements have a radioactive form (radioisotope) and many of these occur naturally. We live our lives surrounded by naturally-radioactive materials, and are constantly bathed in radiation originating in the
rocks
and soil, building materials, the sky (space), food and one another.
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aerb.gov.in
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नाभिकीय पदार्थों के पैकेजिंग की विधि इनके परिवहन में संरक्षा का प्राथमिक आश्वासन है। अपशिष्ट परिवहन के पैकेज इस प्रकार डिज़ाइन किये जाते हैं कि वे चरम दुर्घटना स्थितियों में भी अपशिष्ट का परिरक्षण व संरोधन बना रहे। फ्रांस का ला हेग पुनर्संसाधन सुविधा में 1971 से लेकर, भुक्तशेष ईंधन की लगभग 7000 खेपों (80000 टन से अधिक) का दसियों लाख किलो मीटर तक परिवहन हुआ है। इस कार्य में कोई संपत्ति की हानि, व्यक्तिगत चोट या संरोधन के टूटने की घटना नहीं हुई तथा कार्मिकों को अत्यंत कम डोज़दर (0.33 mSv/वर्ष) प्राप्त हुई।
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www.istanbul.ticketbar.eu
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On the order of Sheikh Taqi, the soldiers caught Kabir ji and making him sit in a boat, tying heavy
rocks
on his back and feet and tying his hands behind his back with a rope, threw him in the middle of the river Ganga.
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jagatgururampalji.org
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परमात्मा कबीर जी विशेषकर ऐसी लीला उस समय किया करते जिस समय दिल्ली का सम्राट सिकंदर लोधी काशी नगरी में आया हो। उस समय सिकंदर लोधी राजा काशी में उपस्थित था। काजी-पंडितों ने राजा को शिकायत कर दी कि कबीर जुलाहे ने जुल्म कर दिया। शर्म-लाज समाप्त करके सरेआम वैश्या के साथ हाथी के ऊपर गलत कार्य कर रहा था। शराब पी रहा है। राजा ने तुरंत पकड़कर गंगा में डुबोकर मारने का आदेश दिया। अपने हाथों से राजा सिकंदर ने हाथों में हथकड़ी तथा पैरों में बेड़ी तथा गले में तोक लगाई। नौका में बैठाकर गंगा दरिया के मध्य में ले जाकर दरिया में सिपाहियों ने पटक दिया। हथकड़ी, बेड़ी तथा तोक अपने आप टूटकर जल में गिर गई। परमात्मा जल पर पद्म आसन लगाकर बैठ गए। नीचे से गंगा जल चक्कर काटता हुआ बह रहा था। परमात्मा जल के ऊपर आराम से बैठे थे। कुछ समय उपरांत परमात्मा कबीर जी गंगा के किनारे आ गए। सिपाहियों ने शेखतकी के आदेश से कबीर जी को पकड़कर नौका में बैठाकर कबीर परमात्मा के पैरों तथा कमर पर भारी पत्थर बाँधकर हाथ पीछे को रस्सी से बाँधकर गंगा दरिया के मध्य में फैंक दिया। रस्से टूट गए। पत्थर जल में डूब गए। परमेश्वर कबीर जी जल के ऊपर बैठे रह गए। जब देखा कि कबीर गंगा दरिया में डूबा नहीं तो क्रोधित होकर शेखतकी ने राजा से कहकर तोब के गोले मारने का आदेश दे दिया। पहले कबीर जी को पत्थर मारे, गोली मारी, तीर मारे। अंत में तोब के गोले चार पहर यानि बारह घण्टे तक कबीर जी के ऊपर चलाए। कोई तो वहीं किनारे पर गिर जाता, कोई दूसरे किनारे पर जाकर गिरता, कोई दूर तालाब में जाकर गिरता। एक भी गोला, पत्थर, बंदूक की गोली या तीर परमेश्वर कबीर जी के आसपास भी नहीं गया। इतना कुछ देखकर भी काशी के व्यक्ति परमेश्वर को नहीं पहचान पाए। तब परमेश्वर कबीर जी ने देखा कि ये तो अक्ल के अँधे हैं। उसी समय गंगा के जल में समा गए और अपने भक्त रविदास जी के घर प्रकट हो गए। दर्शकों को विश्वास हो गया कि कबीर जुलाहा गंगा जल में डूबकर मर गया है। उसके ऊपर रेत व रेग (गारा) जम गई होगी। सब खुशी मनाते हुए नाचते-कूदते हुए नगर को चल पड़े। शेखतकी अपनी मण्डली के साथ संत रविदास जी के घर यह बताने के लिए गया कि जिस कबीर जी को तुम परमात्मा कहते थे, वह डूब गया है, मर गया है। संत रविदास जी के घर पर जाकर देखा तो कबीर जी इकतारा (वाद्य यंत्रा) बजा-बजाकर शब्द गा रहे थे। शेखतकी की तो माँ सी मर गई। राजा सिकंदर के पास जाकर बताया कि वह आँखें बचाकर भाग गया है। रविदास के घर बैठा है। यह सुनकर बादशाह सिंकदर लोधी संत रविदास जी की कुटी पर गया। परमात्मा कबीर जी वहाँ से अंतध्र्यान होकर गंगा दरिया के मध्य में जल के ऊपर समाधि लगाकर जैसे जमीन पर बैठते हैं, ऐसे बैठ गए। रविदास से पूछा कि कबीर जी कहाँ पर हैं? संत रविदास जी ने कहा कि हे बादशाह जी! वे पूर्ण परमात्मा हैं, वे ही अलख अल्लाह हैं। आप इन्हें पहचानो। वे तो मर्जी के मालिक हैं। जहाँ चाहें चले जाऐं। मुझे कुछ नहीं पता, कहाँ चले गए? वे तो सब