undergoing – Hindi Translation – Keybot Dictionary

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Patients returned back after undergoing successful cataract surgery 2nd Feb 2015
मोतियाबिंद के सफल ऑपरेशन के बाद वापिस लौटे लोग 17 फरवरी 2015
  www.dhamma.org  
Obviously someone who is physically too weak to follow the schedule will not be able to benefit from a course. The same is true of someone suffering from psychiatric problems, or someone undergoing emotional upheaval.
यदि कोई शारीरिक रूप से इतना कमजोर है कि दिनचर्या का पालन नहीं कर सकता, तो उसे शिविर से पर्याप्त लाभ नहीं होगा। यही बात मानसिक रोगी या अत्यंत कठिन मानसिक तुफानों में से गुजर रहे व्यक्ति पर भी लागू है। सामान्यतया, बातचीत करके हम यह पता लगा सकते है कि क्या कोई व्यक्ति शिविर से उचित लाभ ले पायेगा या नहीं। कुछ साधकों को हम शिविर में बैठने के पूर्व डॉक्टरों से अनुमति लेनेके लिए भी कह सकते हैं।
  www.vopus.org  
Sometimes very near us, in any city, there are people undergoing needs. Not all needs are due to vices, games, alcohol... but also to lack of job, divorces, evictions, economic crisis...
"...If we do not change internally the society will not change – meaning, if inside of us selfishness and pride which build physical and human borders, then we will enter in a vicious circle which every time will make us go deeper into degradation and destruction."
  org.kikirpa.be  
NTPC sponsors batches of employees who are inducted into their courses based on their performance rating in the company and their performance in the entrance exam conducted by the respective institutes. Unlike other study leave and sabbaticals, employees undergoing these courses do not forego their salary or growth during the during the course.
कर्मचारियों की शैक्षिक अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए और संगठन की जरूरतों के साथ उनका तालमेल बनाने के लिए एनटीपीसी लिमिटेड ने एमडीआई, गुड़गांव; आईआईटी दिल्‍ली; बिट्स पिलानी आदि जैसे प्रतिष्ठित संगठनों के साथ गठबंधन किया है। एनटीपीसी लिमिटेड की ओर से निश्चित संख्‍या वाले कर्मचारी बैच का प्रायोजन किया जाता है जो कंपनी में उनकी निष्‍पादन रेटिंग और संबंधित संस्‍थान द्वारा आयोजित प्रवेश परीक्षा में उनके निष्‍पादन के आधार पर इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेते हैं। अन्‍य अध्‍ययन अवकाशों और शैक्षिक अवकाशों की तुलना में इन पाठ्यक्रमों में अध्‍ययनरत कर्मचारियों को पाठ्यक्रम की अवधि के दौरान वेतन या वृद्धि से वंचित नहीं रखा जाता है।
  www.istanbul.ticketbar.eu  
The children said, “Guru ji said in the satsang that – By serving others, one only gets benefits. One does not face any crisis. If we will eat chapatti, then our stomach will get filled. If we will serve others, we will earn merits. Even if one has a disease, it gets cured by doing bhakti and serving others. Many brother-devotees were telling in the satsang that – “We used to remain ill. After taking initiation (naam), we started doing whatever service we could do. We became healthy. Doctors had given up hope. Look at the prescriptions of our medicines. We were undergoing treatment for four years. Now we do not take any medicine.” (The same evidence is also in Rigved Mandal 10 Sukt 161 Mantra 2 that - If a patient is on the verge of dying, that is, even if one has an incurable disease, if he/she starts doing bhakti, then God brings him/her back from the mouth of death. By making him/her healthy, God provides hundred percent life, that is, full age to that person. – Author)
महापापिनी हूँ। क्या मेरा भी उद्धार हो सकता है? मैं भी दीक्षा लेना चाहती हूँ? लड़की सत्संगी घर की थी। उसको पता था कि दीक्षा लेकर भक्ति करने से पाप कर्म नष्ट होते हैं। जिनके अधिक पाप हैं, भक्ति करने से लाभ ही होगा, पाप कम ही होंगे तथा भविष्य में मानव जन्म भी मिल जाता है यदि मर्यादा में रहकर अंतिम श्वांस तक साधना करता रहे। सत्संग में गुरूदेव जी उदाहरण देकर समझाते हैं कि जैसे किसी का वस्त्रा कम मैला है तो थोड़े प्रयास से ही निर्मल हो जाता है। यदि अधिक मैला है तो दो-तीन बार साबुन-पानी से धोने से निर्मल हो जाता है। जिसने अधिक मैला कर रखा है तथा अन्य दाग भी लगाए हैं तो ड्राईक्लीन से साफ हो जाता है। यदि साफ करने का इरादा दृढ़ हो तो मिस्त्राी का काला हुआ वस्त्र भी साफ हो सकता है। लड़की (पुत्रावधु) को पता था कि सास जी ने तो मिस्त्राी वाली दशा कर ली। फिर भी परमात्मा की शरण से अवश्य लाभ ही होता है। इस उद्देश्य से अपनी सासू माँ को दीक्षा दिला दी। कुछ समय पश्चात् कैंसर में कुछ पीड़ा कम हो गई। सत्संग सुनकर उसे रोना आया कि माता-पिता की बहू-बेटों से क्या आकांक्षा होती है? मुझ पापिन ने अपनी सासू जी के साथ क्या बर्ताव किया। मुझे तो यह रोग होना ही था। यदि पहले यह ज्ञान सुनने को मिल जाता तो मैं क्यों यह पाप करती? निर्मल जीवन जीती। सासू माँ की आत्मा भी खुश करती। अपना जीवन सफल कर लेती। उपरोक्त वचन सुनकर रामभक्त जी की पुत्रावधु उस अपनी सहेली (पुरानी भक्तमति) से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी। आधा घंटे तो अपने को रोक नहीं सकी। अधिक सांत्वना के पश्चात् सुबकी रूकी और अपने ससुर पिता के साथ किए बर्ताव का उल्लेख रोते-रोते किया। अपने ससुर जी की इंसानियत भी बताई कि कभी अपने बेटे से भी नहीं बताया कि तेरी बहू मेरे साथ ऐसा बुरा बर्ताव कर रही है। बेटे के पूछने पर यही कहता था कि बेटा किसी प्रकार की सेवा में कमी नहीं है। बड़े अच्छे घर की बेटी है, समझदार है। हमारा सौभाग्य है कि यह अपने घर आ गई। हमारा तो इस बेटी ने घर बसा दिया है। मैं पापिन ये शब्द सुनकर भी नरम नहीं पड़ी क्योंकि मेरी आत्मा पर पाप कर्मों की परत चढ़ चुकी थी जो दो-तीन बार सत्संग सुनने के पश्चात् पाप की परत उतरी है। आत्मा में अच्छे संस्कार उठने लगे हैं। तीन दिन सत्संग सुनकर भक्त रामभक्त, पोता-पोती तथा पुत्रावधु के साथ घर पर आ गया। बच्चों ने भी वहाँ छोटे बच्चों को खाना खिलाने, पानी पिलाने की सेवा करते अन्य पुराने सत्संगी बच्चों को देखा तो वे भी सेवा करने लगे। घर पर आकर अपने दादा जी के लिए पानी की बाल्टी भरकर दोनों भाई-बहन लटका लाए और बोले, दादा जी! स्नान कर लो। रामभक्त जी ने कहा कि बच्चो! तुम्हारे पेट में दर्द हो जाएगा। इतना भार मत उठाओ। मैं अपने आप ले आऊँगा। बच्चे बोले कि दादा जी! सत्संग में गुरू जी ने बताया था कि सेवा करने से लाभ ही लाभ मिलता है, कोई कष्ट नहीं होता। हम रोटी खाऐंगे तो हमारा पेट भरेगा। हम सेवा करेंगे तो हमें पुण्य मिलेगा। यदि रो