of god – -Translation – Keybot Dictionary

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  12. Childless Couples! ...  
Name of God is Kabir - Holy Bible
What do the Vedas say about Supreme God
  38. Salvation of a Pros...  
Because of which, she was staying awake waiting for them. She heard the endearing nectar-speech from the lotus-mouth of God Kabir ji. It was told in the Satsang that a human (woman/man) life is obtained as a result of a lot of virtuous deeds.
एक रात्रि में सत्संग चल रहा था। थोड़ी दूरी पर काशी शहर की प्रसिद्ध वैश्या चम्पाकली का आलीशान मकान था। उस रात्रि में वैश्या को ग्राहकों का टोटा था। जिस कारण से इंतजार में जाग रही थी। उसको परमात्मा कबीर जी के मुख कमल से प्रिय अमृतवाणी सुनाई दी। सत्संग में बताया गया कि मानव (स्त्राी/पुरूष) का जीवन बड़े पुण्यों से प्राप्त होता है। जो स्त्राी-पुरूष भक्ति नहीं करते, दान-सेवा नहीं करते, वे परमात्मा के चोर हैं। (गीता अध्याय 3 श्लोक 12 में भी कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा से प्राप्त धन का कुछ अंश दान-धर्म में लगाए बिना स्वयं ही पेट भरता रहता है, वह तो परमात्मा का चोर ही है।) जो मानव चोरी, डकैती, ठगी, वैश्यागमन करते हैं, वे महाअपराधी हैं। जो स्त्रिायाँ वैश्या का धंधा करती हैं, वे भी महाअपराधी हैं। परमात्मा के दरबार में उनको कठिन दण्ड दिया जाएगा। मानव जीवन शुभ कर्म करने तथा भक्ति करने के लिए प्राप्त होता है।
  21. Story of Harlal Jaa...  
Meaning: Sant Garibdas ji said that – “The true mantras of true way of worship that I will give you, you have to do their jaap while eating, drinking, while being awake, that is, when you wake up in the morning, do jaap for some time; do jaap for some time before sleeping; while sitting and then while getting up remember the name of God.
भावार्थ:- संत गरीबदास जी ने कहा कि जो सत्य साधना के सत्य मंत्रा मैं आपको दूँगा, उनका जाप खाते-पीते-जागते समय यानि सुबह सोकर उठो, कुछ समय जाप करो। सोने से पूर्व कुछ समय जाप करो। बैठते समय, फिर उठते समय परमात्मा का नाम जाप करो। इस प्रकार घर का कार्य भी होता है, स्मरण भी। जैसे गाँव में देखते हैं कि लोग सारा-सारा दिन ताश खेलते हैं। हुक्के पर वक्त जाया करते हैं। राजनीति की बातें या किसी व्यक्ति की निंदा की चर्चा या सांग-सिनेमा देखने में समय नष्ट करते हैं। उस समय को परमात्मा की भक्ति तथा सत्संग चर्चा सुनने में सदुपयोग करें तो मोक्ष सम्भव है।
  13. Ignorant People Dan...  
Everything got destroyed. Now dance to the music played by the D.J. Such crises are averted by doing the bhakti of God. Therefore, it is a strict order to my (Rampal Das’s) followers that – “Be fearful of God and then act. Perform marriage in a simple way. There is no guarantee in this evil world. Who knows when a crisis may befall?”
एक दिन समाचार पत्रा में पढ़ा कि रोहतक का लड़का भिवानी विवाह के लिए कार में जा रहा था। उसके साथ दोनों बहनों के पति भी उसी कार में सवार थे। पहले दिन सब परिवार वाले (बहनें, माता-पिता, भाई-बटेऊ, चाचे-ताऊ) डी.जेबजाकर नाच रहे थे। उधमस उतार रखा था। कलानौर के पास दुल्हे वाली गाड़ी बड़े ट्राले से टकराई। सर्व कार के यात्राी मारे गए। दुल्हा मरा, दोनों बहनें विधवा हुई। एक ही पुत्रा था, सर्वनाश हो गया। अब नाच लो डी.जे. बजाकर। परमात्मा की भक्ति करने से ऐसे संकट टल जाते हैं। इसलिए मेरे (रामपाल दास के) अनुयाईयों को सख्त आदेश है कि परमात्मा से डरकर कार्य करो। सामान्य विधि से विवाह करो। इस गंदे लोक (काल के लोक) में एक पल का विश्वास नहीं कि कब बिजली गिर जाए।
  56. Das Muqami Rekhta |...  
Meaning: - Even if a devotee faces crores of handships, one should certainly do one’s daily activity (the Sandhya/prayer of the three times), and restraining the unsteady mind, one should recite the mantra of God received in initiation in solitude.
भावार्थ:- भक्त के ऊपर चाहे करोड़ों कष्ट पड़े, परंतु अपनी नित्य की क्रिया (तीनों समय की संध्या) अवश्य करनी चाहिए तथा चंचल मन को रोककर एकान्त में परमात्मा की दीक्षा वाले नाम का जाप करें।
  42. Ek Leva ek deva doo...  
Dear Readers! Please think, nothing is hidden from the sight of God. As you sow, so shall you reap! In this way, people have become associated to each other in every family due to the (Sanskar) impressions of deeds of their previous lives.
प्रिय पाठको! विचार करो, परमात्मा की दृष्टि से कुछ नहीं छुपा है। जैसा करेगा, वैसा भरना पड़ेगा। प्रत्येक परिवार इसी प्रकार संस्कार के कारण एक-दूसरे से जुड़ा है। कोई पूर्व जन्म का कर्ज उतारने के लिए जन्मा है, कोई पूर्व जन्म का कर्ज लेने जन्मा है। उदाहरण के लिए:-
  Information about the P...  
Welfare is possible only by doing worship of God rather than visiting a place of pilgrimage. For that one has to find a Tatvdarshi Saint and then take initiation (updesh) from him and then by doing worship throughout life, one can attain salvation.
ठीक इसी प्रकार किसी धाम व तीर्थ पर रहने वाला पवित्र आत्मा तो राम नाम की सामग्री कूट कर झाड़-पौंछ कर अपनी सर्व कमाई को साथ ले गया। बाद में अनजान श्रद्धालु, उस स्थान पर जाने मात्रा से कल्याण समझें तो उनके मार्ग दर्शकों (गुरुओं) की शास्त्र विधि रहित बताई साधना का ही परिणाम है। उस महान आत्मा सन्त की तरह प्रभु साधना करने से ही कल्याण सम्भव है। उसके लिए तत्वदर्शी संत की खोज करके उससे उपदेश लेकर आजीवन भक्ति करके मोक्ष प्राप्त करना चाहिए। शास्त्र विधि अनुकूल सत साधना मुझ दास (संत रामपाल दास) के पास उपलब्ध है कृपया निःशुल्क प्राप्त करें।
  51. Sixteen Qualities o...  
Tatvgyaan (True and Complete Spiritual Knowledge) 2. Prudence 3. Speak the truth 4. Have contentment in whatever is given by God and consider it to be the wish of God. 5. Do Bhakti with love and speak politely with others. 6. Have patience.
1. तत्त्वज्ञान 2. विवेक 3. सत्य भाषण 4. परमात्मा के दिए में संतोष करे और उसको परमेश्वर की इच्छा जाने 5. प्रेम भाव से भक्ति करे तथा अन्य से भी मृदु भाषा में बात करे 6. धैर्य रखे, सतगुरू ने जो ज्ञान दिया है, उसकी सफलता के लिए हौंसला रखे फल की जल्दी न करे 7. किसी के साथ दगा (धोखा) नहीं करे 8. दया भाव रखे 9. भक्त तथा संत का आभूषण क्षमा भी है। शत्राु को भी क्षमा कर देना चाहिए 10. शील स्वभाव होना चाहिए। 11. भक्ति को निष्काम भाव से करे, सांसारिक लाभ प्राप्ति के उद्देश्य से नहीं करे 12. त्याग की भावना बहुत अनिवार्य है 13. बैराग्य होना चाहिए। संसार को असार तथा अपने जीवन को अस्थाई जानकर परमात्मा के प्रति विशेष लगाव होना मोक्ष में अति आवश्यक है 14. भक्त का विशेष गुण शांति होती है, यह भी अनिवार्य है 15. भक्ति करना यानि भक्ति करके अपने जीव का कल्याण कराऐं 16. प्रत्येक व्यक्ति के साथ मित्र के समान व्यवहार करना चाहिए।
  Who Delivered the Knowl...  
Kaal (Jyoti Niranjan) is commiting all these wrongdoings. Until this soul comes in the refuge of God Kabir (SatPurush) by means of a Complete Saint (Tatvdarshi), Kaal will keep on inflicting atrocities like this.
श्री कृष्ण सहित सर्व यादवों का अन्तिम संस्कार कर अर्जुन को छोड़ कर चारों भाई इन्द्रप्रस्थ (दिल्ली) चले गए। पीछे से अर्जुन द्वारिका की स्त्रिायों को लिए आ रहा था। रास्ते में जंगली लोगों ने सर्व गोपियों को लूटा तथा कुछेक को भगा ले गए तथा अर्जुन को पकड़ कर पीटा। अर्जुन के हाथ में वही गांडीव धनुष था जिससे महाभारत के युद्ध में अनगिनत हत्याऐं कर डाली थी, वह भी नहीं चला। तब अर्जुन ने कहा कि यह श्री कृष्ण वास्तव में झूठा तथा कपटी था। जब युद्ध में पाप करवाना था तब तो मुझे शक्ति प्रदान कर दी, एक तीर से सैकड़ों योद्धाओं को मार गिराता था और आज वह शक्ति छीन ली, खड़ा-खड़ा पिट रहा हूँ। इसी विषय में पूर्ण ब्रह्म कबीर साहेब (कविर्देव) जी का कहना है कि श्री कृष्ण जी कपटी व झूठे नहीं थे। यह सर्व जुल्म काल (ज्योति निरंजन) कर रहा है। जब तक यह आत्मा कबीर परमेश्वर (सतपुरुष) की शरण में पूरे सन्त (तत्वदर्शी) के माध्यम से नहीं आ जाएगी, तब तक काल इसी तरह कष्ट पर कष्ट देता रहेगा। पूर्ण जानकारी तत्वज्ञान से होती है। इसीलिए काल कौन है ? यह जानने के लिए कृप्या पढ़ें इसी पुस्तक के पृष्ठ 20 से 65 तक।
  23. Story of Origin of ...  
Meaning: - Prophet Muhammad was a respectable great man who was a messenger of God. One lakh eighty thousand such prophets (from Baba Adam to Muhammad) have been considered to be in Muslim religion. All of them were holy men who had never used a sword on any animal or bird.
भावार्थ:- नबी मुहम्मद तो आदरणीय महापुरूष थे जो परमात्मा के संदेशवाहक थे। ऐसे-ऐसे एक लाख अस्सी हजार पैगंबर मुसलमान धर्म में (बाबा आदम से लेकर मुहम्मद तक) माने गए हैं। वे सब पाक (पवित्रा) व्यक्ति थे जिन्होंने कभी किसी पशु-पक्षी पर करद यानि तलवार नहीं चलाई। वे तो परमात्मा से डरने वाले थे। परमात्मा कृपा पात्रा थे। बाद में कुछ मुल्ला-काजियों ने माँस खाने की परम्परा शुरू कर दी जो आगे चलकर धार्मिकता का उपवाद बन गई। उसी आधार से सर्व मुसलमान भाई पाप को खा रहे हैं। फिर भ्रमित मुसलमानों ने तम्बाकू का सेवन (खाना, हुक्का बनाकर पीना) प्रारम्भ कर दिया। भोले हिन्दु धर्म के व्यक्तियों ने उनकी चाल नहीं समझी। उनके कहने से तमाखू का सेवन जोर-शोर से शुरू कर दिया। वर्तमान में तो यह पंचायत का प्याला बन गया है जो भारी भूल है। अज्ञानता का पर्दा है। इसे भूलकर भी सेवन नहीं करना चाहिए। संत गरीबदास जी ने फिर बताया है कि हे भक्त हरलाल जी! और सुन तमाखू सेवन के पाप:-
  56. Das Muqami Rekhta |...  
There is evidence in the Vedas that the Saviour of the world will himself do and make others do three times of Sandhya (prayer of God). He advises to do prayer of the Complete God in the morning and evening, and prayer of all the gods of the world in the afternoon.
वेदों में प्रमाण है कि जो जगत का तारणहार होगा, वह तीन बार की संध्या करता तथा करवाता है। सुबह और शाम पूर्ण परमात्मा की स्तुति-आरती तथा मध्यदिन में विश्व के सब देवताओं की स्तुति करने को कहता है। प्रमाण:- ऋग्वेद मण्डल नं. 8 सूक्त 1 मंत्रा 29 में तथा यजुर्वेद अध्याय 19 मंत्रा 26 में है।
  46. Salvation of King P...  
This evidence is also given in Gita Chapter 8 Verse 6 that “O Bharat! It is a law of God that whoever one remembers at the time of death, he/she goes to him/her only.” As per this very law, the soul of King Parikshit abandoning the material body (which had died with the venom of the snake), went to heaven in its subtle body along with Sage Shukdev in an aircraft.
गीता अध्याय 8 श्लोक 6 में भी यही प्रमाण है कि ‘‘हे भारत! परमात्मा का यह विधान है कि जो अन्त समय में जिसमें भाव यानि आस्था रखकर स्मरण करता है, वह उसी को प्राप्त होता है।’’ इसी विधानानुसार राजा परीक्षित का जीव स्थूल शरीर त्यागकर (जो सर्प विष से मर गया था) सूक्ष्म शरीर युक्त शुकदेव ऋषि के साथ विमान में बैठकर स्वर्ग में चला गया।
  21. Story of Harlal Jaa...  
Meaning: Sant Garibdas ji said that – “The true mantras of true way of worship that I will give you, you have to do their jaap while eating, drinking, while being awake, that is, when you wake up in the morning, do jaap for some time; do jaap for some time before sleeping; while sitting and then while getting up remember the name of God.
भावार्थ:- संत गरीबदास जी ने कहा कि जो सत्य साधना के सत्य मंत्रा मैं आपको दूँगा, उनका जाप खाते-पीते-जागते समय यानि सुबह सोकर उठो, कुछ समय जाप करो। सोने से पूर्व कुछ समय जाप करो। बैठते समय, फिर उठते समय परमात्मा का नाम जाप करो। इस प्रकार घर का कार्य भी होता है, स्मरण भी। जैसे गाँव में देखते हैं कि लोग सारा-सारा दिन ताश खेलते हैं। हुक्के पर वक्त जाया करते हैं। राजनीति की बातें या किसी व्यक्ति की निंदा की चर्चा या सांग-सिनेमा देखने में समय नष्ट करते हैं। उस समय को परमात्मा की भक्ति तथा सत्संग चर्चा सुनने में सदुपयोग करें तो मोक्ष सम्भव है।
  28. A Father Forgives A...  
If I will eat food, my stomach will get filled. If you will eat, your stomach will get filled. All the living beings are children of God. You may serve them thinking that they are children of the Master.
‘‘सत्संग वचन’’:- गुरूदेव जी बताते हैं कि जो सेवा-भक्ति करेगा, उसी को फल मिलेगा। मैं भोजन खाऊँगा तो मेरा पेट भरेगा। आप खाओगे तो आपका पेट भरेगा। सब प्राणी परमात्मा के बच्चे हैं। आप धनी के बच्चे समझकर सेवा करो। जैसे एक धनी की लड़की 8.9 वर्ष की थी। उसकी देखरेख के लिए एक नौकरानी रखी थी। वह उस लड़की को गर्मियों में स्कूल छोड़ने जाती थी तो उस लड़की के ऊपर छाते (छतरी) से छाया करके चलती थी, स्वयं धूप सहन करती थी जिससे धनी खुश रहता था और नौकरानी को तनख्वाह देता था। आप सब यह विचार करके अपने-परायों का ध्यान रखें। सास-ससुर की सेवा, छोटे-बड़े की सेवा, सबका सम्मान करना आप जी का परम कर्तव्य है। यदि आप-अपने सास-ससुर, माता-पिता या अन्य आश्रितों की सेवा करोगे तो परमात्मा आपकी सेवा का प्रबंध करेगा। आप अपने छोटे-बड़े बच्चों को भी सत्संग में साथ लाया करो। बच्चों में भी छोटे-बड़ों की सेवा करने, अच्छा व्यवहार करने के संस्कार पड़ेंगे। वे बच्चे बड़े होकर आपकी (वृद्ध हो जाओगे, तब) भी सेवा ऐसे ही करेंगे। जैसे बेटी एक बाप-माँ को छोड़कर नए माता (सास)-पिता (ससुर) के पास आती है। अब जन्म के माता-पिता तो इतने ही साथी थे। उन्होंने पाल-पोसकर नए माता-पिता को सौंप दिया। सास-ससुर का कर्तव्य है कि आने वाली बेटी को अपनी बेटी की तरह प्यार दे। भेदभाव स्वपन में भी नई बेटी व अपनी जन्म की बेटी में न करे जो झगड़े की जड़ है। पुत्रवधु को चाहिए कि नए घर की परिस्थितियों के अनुसार अपने को ढ़ाले। माँ के घर वाले बर्ताव को कम प्रयोग करे। अब पुत्रावधु का घर-परिवार यही (ससुराल) है।
  33. Meera Bai Got Refug...  
Kabir Ji had said, “I have such mantras of bhakti by which birth and death end forever. One goes to that supreme abode about which it is mentioned in Gita Chapter 15 Verse 4 that after getting the Tatvgyan and Tatvdarshi Saint, one should search for that supreme abode of God, having gone where, worshippers never return to the world. Only worship that one God.”
मीराबाई बोली कि हे महाराज जी! भगवान श्री कृष्ण मुझे साक्षात दर्शन देते हैं। मैं उनसे संवाद करती हूँ। कबीर जी ने कहा कि हे मीराबाई जी! आप एक काम करो। भगवान श्री कृष्ण जी से ही पूछ लेना कि आपसे ऊपर भी कोई मालिक है। वे देवता हैं, कभी झूठ नहीं बोलेंगे। मीराबाई को लगा कि वह पागल हो जाएगी यदि श्री कृष्ण जी से भी ऊपर कोई परमात्मा है तो। रात्रि में मीरा जी ने भगवान श्री कृष्ण जी का आह्वान किया। त्रिलोकी नाथ प्रकट हुए। मीरा ने अपनी शंका के समाधान के लिए निवेदन किया कि हे प्रभु! क्या आपसे ऊपर भी कोई परमात्मा है। एक संत ने सत्संग में बताया है। श्री कृष्ण जी ने कहा कि मीरा! परमात्मा तो है, परंतु वह किसी को दर्शन नहीं देता। हमने बहुत समाधि व साधना करके देख ली है। मीराबाई जी ने सत्संग में परमात्मा कबीर जी से यह भी सुना था कि उस पूर्ण परमात्मा को मैं प्रत्यक्ष दिखाऊँगा। सत्य साधना करके उसके पास सतलोक में भेज दूँगा। मीराबाई ने श्री कृष्ण जी से फिर प्रश्न किया कि क्या आप जीव का जन्म-मरण समाप्त कर सकते हो? श्री कृष्ण जी ने कहा कि यह संभव नहीं। कबीर जी ने कहा था कि मेरे पास ऐसा भक्ति मंत्रा है जिससे जन्म-मरण सदा के लिए समाप्त हो जाता है। वह परमधाम प्राप्त होता है जिसके विषय में गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में कहा है कि तत्वज्ञान तथा तत्वदर्शी संत की प्राप्ति के पश्चात् परमात्मा के उस परमधाम की खोज करनी चाहिए जहाँ जाने के पश्चात् साधक फिर लौटकर संसार में कभी नहीं आते। उसी एक परमात्मा की भक्ति करो। मीराबाई ने कहा कि हे भगवान श्री कृष्ण जी! संत जी कह रहे थे कि मैं जन्म-मरण समाप्त कर देता हूँ। अब मैं क्या करूं। मुझे तो पूर्ण मोक्ष की चाह है। श्री कृष्ण जी बोले कि मीरा! आप उस संत की शरण ग्रहण करो, अपना कल्याण कराओ। मुझे जितना ज्ञान था, वह बता दिया। मीरा अगले दिन मंदिर नहीं गई। सीधी संत जी के पास अपनी नौकरानियों के साथ गई तथा दीक्षा लेने की इच्छा व्यक्त की तथा श्री कृष्ण जी से हुई वार्ता भी संत कबीर जी से साझा की। उस समय छूआछात चरम पर थी। ठाकुर लोग अपने को सर्वोत्तम मानते थे। परमात्मा मान-बड़ाई वाले प्राणी को कभी नहीं मिलता। मीराबाई की परीक्षा के लिए कबीर जी ने संत रविदास जी से कहा कि आप मीरा राठौर को प्रथम मंत्रा दे दो। यह मेरा आपको आदेश है। संत रविदास जी ने आज्ञा का पालन किया। संत कबीर परमात्मा जी ने मीरा से कहा कि बहन जी! वो बैठे संत जी, उनके पास जाकर दीक्षा ले लें। बहन मीरा जी तुरंत रविदास जी के पास गई और बोली, संत जी! दीक्षा देकर कल्याण करो। संत रविदास जी ने बताया कि बहन जी! मैं चमार जाति से हूँ। आप ठाकुरों की बेटी हो। आपके समाज के लोग आपको बुरा-भला कहेंगे। जाति से बाहर कर देंगे। आप विचार कर लें। मीराबाई अधिकारी आत्मा थी। परमात्मा के लिए मर-मिटने के लिए सदा तत्पर रहती थी। बोली, संत जी! आप मेरे पिता, मैं आपकी बेटी। मुझे दीक्षा दो। भाड़ में पड़ो समाज। कल को कुतिया बनूंगी, तब यह ठाकुर
  13. Ignorant People Dan...  
Everything got destroyed. Now dance to the music played by the D.J. Such crises are averted by doing the bhakti of God. Therefore, it is a strict order to my (Rampal Das’s) followers that – “Be fearful of God and then act. Perform marriage in a simple way. There is no guarantee in this evil world. Who knows when a crisis may befall?”
एक दिन समाचार पत्रा में पढ़ा कि रोहतक का लड़का भिवानी विवाह के लिए कार में जा रहा था। उसके साथ दोनों बहनों के पति भी उसी कार में सवार थे। पहले दिन सब परिवार वाले (बहनें, माता-पिता, भाई-बटेऊ, चाचे-ताऊ) डी.जेबजाकर नाच रहे थे। उधमस उतार रखा था। कलानौर के पास दुल्हे वाली गाड़ी बड़े ट्राले से टकराई। सर्व कार के यात्राी मारे गए। दुल्हा मरा, दोनों बहनें विधवा हुई। एक ही पुत्रा था, सर्वनाश हो गया। अब नाच लो डी.जे. बजाकर। परमात्मा की भक्ति करने से ऐसे संकट टल जाते हैं। इसलिए मेरे (रामपाल दास के) अनुयाईयों को सख्त आदेश है कि परमात्मा से डरकर कार्य करो। सामान्य विधि से विवाह करो। इस गंदे लोक (काल के लोक) में एक पल का विश्वास नहीं कि कब बिजली गिर जाए।
  Conversation of God Kab...  
Narrating this account to Dharmdas ji, God Kabir said that Dharmdas, on hearing the calls of these living beings, I, adopting the appearance of Jogjit (one of God Kabir's son), came to Kaal lok from my Satlok.
यह वृतान्त कबीर साहेब ने धर्मदास जी को बताते हुए कहा कि धर्मदास इन जीवों की पुकार सुनकर मैं अपने सतलोक से जोगजीत का रूप बनाकर काल लोक में आया। तब इक्कीसवें ब्रह्मण्ड में जहां काल का निज घर है वहां पर तप्तशिला पर जीवों को भूनकर सुक्ष्म शरीर से गंध निकाला जा रहा था। मेरे पहुंचने के बाद उन जीवों की जलन समाप्त को गई। उन्होंने मुझे देखकर कहा कि हे पुरुष ! आप कौन हो? आपके दर्शन मात्रा से ही हमें बड़ा सुख व शांति का आभास हो रहा है। फिर मैंने बताया कि मैं पारब्रह्म परमेश्वर कबीर हूं। आप सब जीव मेरे लोक से आकर काल ब्रह्म के लोक में फंस गए हो। यह काल रोजाना एक लाख मानव के सुक्ष्म शरीर से गंध निकाल कर खाता है और बाद में नाना-प्रकार की योनियों में दण्ड भोगने के लिए छोड़ देता है। तब वे जीवात्माएं कहने लगी कि हे दयालु परमेश्वर ! हमारे को इस काल की जेल से छुड़वाओ। मैंने बताया कि यह ब्रह्मण्ड काल ने तीन बार भक्ति करके मेरे से प्राप्त किए हुए हैं जो आप यहां सब वस्तुओं का प्रयोग कर रहे हो ये सभी काल की हैं और आप सब अपनी इच्छा से घूमने के लिए आए हो। इसलिए अब आपके ऊपर काल ब्रह्म का बहुत ज्यादा ऋण हो चुका है और वह ऋण मेरे सच्चे नाम के जाप के बिना नहीं उतर सकता।
  24. Other Views on Toba...  
That living being is thrown in hell and in the street-like lives of other organisms. What answer will those people, who commit the above-mentioned sin, give in the court of God, that is, they will be speechless.
भावार्थ:- उपरोक्त वाणियों का भावार्थ है कि मानव शरीर को आॅक्सीजन की आवश्यकता है। उसके स्थान पर तम्बाकू का धुँआ (कार्बनडाईआॅक्साइड) प्रवेश करता है तो उनको खाँसी रोग हो जाता है। पित्त तथा बाई (बाय) का रोग हो जाता है। हुक्का पीने वाले का बैठने का स्टाईल बताया है कि हुक्का पीने वाले एक-दो तो हुक्के के निकट बैठेंगे। एक कुछ दूरी पर बैठेगा और कहेगा कि सरकाइये थोड़ा-सा। दूसरे उसकी ओर हुक्का देंगे। फिर नै (नली जिससे धँुआ खींचते हैं) गुरड़-गुरड़ बाजैगी। आप तो हुक्का पीकर डूबे हैं और छोटे बच्चे भी उनको देखकर वही पाप करके नरक की काली धार में डूबेंगे, जो तम्बाकू पीते हैं, उनके तो भाग फूटे ही हैं। अन्य को तम्बाकू पीने के लिए उत्प्रेरक बनकर डुबोते हैं। उपरोक्त बुराई करने वाले तो अपना जीवन ऐसे व्यर्थ कर जाते हैं जैसे भड़भूजा बालु रेत को आग से खूब गर्म करके चने भूनता है। फिर सारा कार्य करके रेत को गली में फैंक देता है। इसी प्रकार जो मानव उपरोक्त बुराई करता है, वह भी अपने मानव जीवन को इसी प्रकार व्यर्थ करके चला जाता है। उस जीव को नरक तथा अन्य प्राणियों के जीवन रूपी गली में फैंक दिया जाता है। जो व्यक्ति उपरोक्त पाप करते हैं, वे भगवान के दरबार में क्या जवाब देंगे यानि बोलने योग्य नहीं रहेंगे।
  Conversation of God Kab...  
Conversation of God Kabir with Kaal about taking souls to their original home "Satlok" in Kalyug
कबीर साहेब की काल से वार्ता जिसमे कबीर साहिब ने जीव आत्माओ को कलयुग में अपने निज घर सतलोक मे वापिस ले जाने का वर्णन किया है।
  41. After Taking Initia...  
Only that person can reap the benefit of God’s bhakti who has full faith in the magnifincence of God.
परमात्मा की भक्ति का लाभ उसी को होता है जो परमात्मा की महिमा पर पूर्ण विश्वास रखता है।
  41. After Taking Initia...  
Only that person can reap the benefit of God’s bhakti who has full faith in the magnifincence of God.
परमात्मा की भक्ति का लाभ उसी को होता है जो परमात्मा की महिमा पर पूर्ण विश्वास रखता है।
  51. Sixteen Qualities o...  
Meaning: - A devotee should have some special characteristics for the attainment of God. These 16 ornaments are mandatory.
भावार्थ:- परमात्मा प्राप्ति के लिए भक्त में कुछ लक्षण विशेष होने चाहिऐं। ये 16 आभूषण अनिवार्य हैं।
  33. Meera Bai Got Refug...  
Supreme God Kabir Ji and Sant Ravidas ji were delivering Satsang there. It was around 10 o’clock in the morning. Meera saw that a discussion and tale of God is going on here. Let me listen to it for some time and then move on.
जिस श्री कृष्ण जी के मंदिर में मीराबाई पूजा करने जाती थी, उसके मार्ग में एक छोटा बगीचा था। उसमें कुछ घनी छाया वाले वृक्ष भी थे। उस बगीचे में परमेश्वर कबीर जी तथा संत रविदास जी सत्संग कर रहे थे। सुबह के लगभग 10 बजे का समय था। मीरा जी ने देखा कि यहाँ परमात्मा की चर्चा या कथा चल रही है। कुछ देर सुनकर चलते हैं।
  14. Teachings of Saints...  
Due to this, I can only eat in moderation. Enjoyment never enters my mind. I am always engrossed in the thoughts of God. Your eyes of knowledge have been blindfolded by ignorance. They are opened in Satsang, by which one gets the way of living.
आप अध्यात्म ज्ञानहीन प्राणी मस्ती मारते हो और अचानक मौत ले जाती है। कुछ नहीं कर पाते। ऐसे ही मुझे अपनी मृत्यु का दिन दिखाई देता है जो चालीस वर्ष बाद आना है। इस कारण से खाना-पीना ठीक-ठीक ही लिया जाता है। मस्ती मन में कभी नहीं आती। परमात्मा की याद बनी रहती है। आपकी ज्ञान की आँखों पर अज्ञान की पट्टी बँधी है जो सत्संग में खोली जाती है जिससे जीने की राह मिल जाती है। मोक्ष प्राप्त होता है। संत ने राजा से कहकर सेठ को बरी करवा दिया। सेठ ने नाम लेकर कल्याण करवाया।
  51. Sixteen Qualities o...  
One should recite the name of Kabir with devotion, that is, one should take name of Kabir Ji with pride. One should not feel ashamed thinking that – ‘How can this be the name of God?’ Do not be afraid of those who say this.
कबीर नाम श्रद्धा से जपे यानि गर्व के साथ कबीर जी का नाम ले। शर्म नहीं करे कि यह भी कोई परमात्मा का नाम है। ऐसे कहने वालों से डरे नहीं, शर्मावै नहीं और इसके साथ-साथ तेरा (धर्मदास) नाम भी आदर से कहे।
  Conversation of God Kab...  
» Gyan Ganga - River of Knowledge » Conversation of God Kabir with Kaal
» ज्ञान गंगा » कबीर साहेब की काल से वार्ता
  51. Sixteen Qualities o...  
To get across this ocean of world, that is, to escape from this Kaal-Lok, the power of Bhakti is needed. For the attainment of God, it is imperative for a soul to have sixteen (16) characteristics. These are said to be the sixteen ornaments of a soul.
परमेश्वर कबीर जी ने कहा कि हे धर्मदास! भवसागर यानि काल लोक से निकलने के लिए भक्ति की शक्ति की आवश्यकता होती है। परमात्मा प्राप्ति के लिए जीव में सोलह (16) लक्षण अनिवार्य हैं। इनको आत्मा के सोलह सिंगार (आभूषण) कहा जाता है।
  38. Salvation of a Pros...  
Because of which, she was staying awake waiting for them. She heard the endearing nectar-speech from the lotus-mouth of God Kabir ji. It was told in the Satsang that a human (woman/man) life is obtained as a result of a lot of virtuous deeds.
एक रात्रि में सत्संग चल रहा था। थोड़ी दूरी पर काशी शहर की प्रसिद्ध वैश्या चम्पाकली का आलीशान मकान था। उस रात्रि में वैश्या को ग्राहकों का टोटा था। जिस कारण से इंतजार में जाग रही थी। उसको परमात्मा कबीर जी के मुख कमल से प्रिय अमृतवाणी सुनाई दी। सत्संग में बताया गया कि मानव (स्त्राी/पुरूष) का जीवन बड़े पुण्यों से प्राप्त होता है। जो स्त्राी-पुरूष भक्ति नहीं करते, दान-सेवा नहीं करते, वे परमात्मा के चोर हैं। (गीता अध्याय 3 श्लोक 12 में भी कहा कि जो व्यक्ति परमात्मा से प्राप्त धन का कुछ अंश दान-धर्म में लगाए बिना स्वयं ही पेट भरता रहता है, वह तो परमात्मा का चोर ही है।) जो मानव चोरी, डकैती, ठगी, वैश्यागमन करते हैं, वे महाअपराधी हैं। जो स्त्रिायाँ वैश्या का धंधा करती हैं, वे भी महाअपराधी हैं। परमात्मा के दरबार में उनको कठिन दण्ड दिया जाएगा। मानव जीवन शुभ कर्म करने तथा भक्ति करने के लिए प्राप्त होता है।
  51. Sixteen Qualities o...  
After having these abovementioned qualities, one would be able to go to Satyalok. Apart from these, serve the Guru; have faith in the way of worship given by the Guru. It is compulsory to do Bhakti of God and organise Sant Samagam (congregation of saints).
ये उपरोक्त गुण होने के पश्चात् सत्यलोक जाया जाएगा। इनके अतिरिक्त गुरू की सेवा, गुरू पद्यति में विश्वास रखे। परमात्मा की भक्ति और संत समागम करना अनिवार्य है।
  12. Childless Couples! ...  
She does not like herself to be called barren. Even if after examination a doctor declares that – “You do not have any signs of infertility. It is a will of God.” But a woman devoid of Tatvgyan dies with this desire only.
जिन पुण्यात्माओं को संतान नहीं होती तो आध्यात्मिक ज्ञान के अभाव से उनकी तड़फ संतान प्राप्ति की बनी रहती है। उसके लिए हरसंभव प्रयत्न करते हैं। फिर भी कोई लेन-देन वाला (संतान) नहीं मिलता है तो आजीवन संतान प्राप्ति न होने के दुःख को झेलते हैं। विशेषकर स्त्राी की संतान उत्पन्न करने की इच्छा प्रबल होती है। वह अपने को बांझ कहलवाना नहीं चाहती। भले ही जाँच करके डाॅक्टर बता देते हैं कि आप में बांझ के कोई लक्षण नहीं हैं। विधाता की लीला है। परंतु तत्वज्ञानहीन स्त्राी इसी तड़फ में मर जाती है। भक्ति न करने के कारण उसका अगला जन्म कुतिया का होता है। फिर जम के दूत उसे कहते हैं कि बहन जी! अब संतान पैदा करके सारी कसर निकाल ले। एक ब्यांत में आठ-आठ जामैगी (जन्म देगी)। फिर अगला जन्म तेरा सूअरी का होगा। एक बार में बारह संतान को जन्म देगी और सात-आठ ब्यांत करेगी, संतान की सारी भूख मिटा लिए।
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